Back

राष्ट्रपति ने कहा, स्विस टेक््नॉलॉजी कंपनियों को मेक इन इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया, स्वच्छ भारत और स्किल इंडिया जैसी हमारी पहलों में भाग लेना चाहिए

राष्ट्रपति भवन : 01.09.2017

भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द ने कल (31 अगस्त, 2017)राष्ट्रपति भवन में स्विस परिसंघ की राष्ट्रपति,महामहिम सुश्री डोरिस ल्यूथार्ड का स्वागत किया। उन्होंने उनके सम्मान में एक राजभोज का भी आयोजन किया।

स्विस राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि स्विट्जरलैंड और भारत स्वाभाविक साझीदार हैं। स्विट्जरलैंड एक सबसे पुराना और भारत सबसे विशाल लोकतंत्र है। अगस्त, 1948 में नई दिल्ली में भारत और स्विट्जरलैंड के बीच मैत्री संधि स्वतंत्र भारत की सबसे पहली संधियों में से एक थी।

राष्ट्रपति ने कहा कि स्विट्जरलैंड भारत के लिए एक महत्वपूर्ण व्यापार और निवेश साझीदार है। भारत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का एक पसंदीदा स्थान है क्योंकि यह विश्व की सबसे तेज बढ़ रही विशाल अर्थव्यवस्था है। उन्होंने कहा कि भारत ने कारोबार करने की सुगमता और जी.एस.टी और अन्य प्रयासों के माध्यम से एक समेकित बाजार के निर्माण में अत्यधिक प्रगति की है। स्विस कंपनियां इसका लाभ उठाने की बेहतर स्थिति में हैं। उन्होंने स्विस कंपिनयों को मेक इन इंडिया,स्टार्ट अप इंडिया,स्वच्छ भारत और स्किल इंडिया जैसी पहलों में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया।

तत्पश्चात्, अपने राजभोज अभिभाषण में,राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि स्विस राष्ट्रपति की यात्रा का विशेष महत्व है क्योंकि यह वर्ष द्विपक्षीय संबंधों का एक पड़ाव है। हमारे देश मैत्री और स्थापना संधि के 70वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। भारत स्वयं अपनी स्वतंत्रता की 70वीं वर्षगांठ मना रहा है। भारत और स्विट्जरलैंड लोकतांत्रिक और बहुलवादी समाजों का प्रतिनिधित्व करते हैं जो‘‘असहमति के प्रति सम्मान’’ और ‘‘अनेकता में एकता’’के सिद्धांतों में विश्वास करते हैं। स्विट्जरलैंड भारत का सातवां सबसे बड़ा व्यापार साझीदार और ग्यारहवां सबसे बड़ा विदेशी निवेशक है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड अपने व्यापार,निवेश और प्रौद्योगिक आदान-प्रदान को बढ़ा सकते हैं और उन्हें विविध बना सकते हैं। हमारे देशों को सूक्ष्म और उच्च प्रौद्योगिकी निर्माण,बुनियादी ढांचे, कौशल विकास, नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ-तकनीकी अनुसंधान जैसे प्रमुख क्षेत्रों में और घनिष्ठ कारोबार साझेदारियां भी करनी चाहिए। अनुसंधान और विकास प्रयोगशालाओं और संस्थाओं के बीच साझेदारियां करने की संभावना मौजूद है।

राष्ट्रपति ने कहा कि स्विट्जरलैंड की तरह भारत बहुपक्षवाद के प्रति वचनबद्ध है। फिर भी बहुपक्षीय व्यवस्था के लिए अनेक परिवर्तन करने की जरूरत है;जैसे संयुक्त राष्ट्र और अन्य बहुपक्षीय संस्थाओं का सुधार और पुनर्गठन;अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद और कट्टरतावाद तथा वित्तीय और साइबर अपराध और इंटरनेट शासन की तात्कालिक चुनौतियों से निपटना,जलवायु परिवर्तन की गहरी चिंताओं का सामना करना और सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करना। उन्होंने कहा कि भारत,नियम आधारित बहुपक्षीय प्रणाली के दायरे में काम करते हुए, इन सभी प्रयासों में स्विट्जरलैंड के साथ कार्य करने के लिए उत्सुक है।

यह विज्ञप्ति 1000 बजे जारी की गई