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राष्ट्रपति ने कहा, बच्चों को सबसे पहले श्रेष्ठ मनुष्य बनने की शिक्षा दी जानी चाहिए

राष्ट्रपति भवन : 05.09.2017

भारत के राष्ट्रपति,श्री राम नाथ कोविन्द ने आज (05 सितंबर, 2017)राष्ट्रपति भवन में‘राष्ट्रीय उत्कृष्ट शिक्षक पुरस्कार’के 319 विजेताओं का स्वागत किया। पहली बार भारत के राष्ट्रपति ने राष्ट्रपति भवन में शिक्षक दिवस पर पुरस्कार विजेता शिक्षकों के लिए जलपान का आयोजन किया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने उन पुरस्कार विजेता शिक्षकों को बधाई दी जिन्हें आज सुबह पुरस्कार प्रदान किए गए थे। उन्होंने कहा कि भारत के पूर्व राष्ट्रपति,डॉ. एस. राधाकृष्णन एक प्रख्यात शिक्षक थे। उनका जन्म दिवस पर जिसे शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है,हम शिक्षकों के प्रति आदर सम्मान व्यक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में शिक्षकों को ईश्वर का रूप माना जाता है।

3. शराष्ट्रपति ने कहा कि डॉ. एस. राधाकृष्णन,डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम और श्री प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति बने परंतु उन्हें शिक्षकों के रूप में याद किया जाता है। गांधी जी भी दिल्ली में गरीब बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाया करते थे। बच्चों के भविष्य की नींव रखने में शिक्षकों का एक बड़ा दायित्व है। उन्होंने शिक्षक समुदाय से अपने पेशे के महत्व को समझने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि शिक्षा के स्तर में कोई गिरावट न आए। उन्होंने कहा कि उन्हें यह विश्वास है कि वे अपने दायित्व को भली-भांति निभाएंगे। उनके अनुसार डॉ. एस.राधाकृष्णन ने एक बार कहा था कि‘जब हम ये सोचे कि हम यह जानते हैं तो हमारा सीखने की प्रक्रिया समाप्त हो जाती है’इसलिए यह जरूरी है कि शिक्षकों के साथ-साथ हम सभी को सीखना नहीं छोड़ना चाहिए।

4. राष्ट्रपति ने कहा कि भारत विविधता की भूमि है। स्कूलों के बच्चे विभिन्न सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि से आते हैं। शिक्षकों को इसका ध्यान रखना चाहिए। उन्हें बच्चों को पारिवारिक पृष्ठभूमि को समझने और कक्षा के विद्यार्थियों के बीच असमानता कम करने का प्रयास करना चाहिए।

5.राष्ट्रपति ने कहा कि हमें समाज में कुछ योगदान देना चाहिए। हमारी परंपरा में शिक्षा प्रदान करने को विद्यादान कहा जाता है। शिक्षक भावी पीढ़ी का निर्माण करते हैं। वे अपने कार्यों के द्वारा अपने विद्यार्थियों के सम्मुख आदर्श बन सकते हैं। अपने विद्यार्थियों की सर्वोत्तम क्षमता को उजागर करना शिक्षकों का दायित्व है। कबीर का उद्धरण देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षकों का दर्जा बहुत ऊंचा है वे बच्चों के जीवन को संवारते हैं,इसलिए यह आवश्यक है कि हमारे बच्चों को सबसे पहले एक श्रेष्ठ मनुष्य बनने की शिक्षा दी जानी चाहिए और उनमें ईमानदारी व निष्ठा के मूल्य संचारित करने चाहिए। तभी वे अपने पसंदीदा पेशे में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर पाएंगे। उन्होंने कहा कि शिक्षक सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रनिर्माता हैं।

इस अवसर पर उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री,श्री प्रकाश जावड़ेकर और मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री,डॉ. सत्यपाल सिंह शामिल थे। राष्ट्रीय बाल भवन के विद्यार्थियों ने भी एक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया।

यह विज्ञप्ति 1940 बजे जारी की गई।