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भारत के राष्ट्रपति ने केन्द्रीय सूचना आयोग के 13वें सम्‍मेलन का उद्घाटन किया

राष्ट्रपति भवन : 12.10.2018

भारत के राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविन्द ने आज (12 अक्टूबर, 2018) नई दिल्ली में केन्‍द्रीय सूचना आयोग के 13वें सम्मेलन का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि सूचना का मुक्त प्रवाह लोकतंत्र का मूल तत्व है।और किसी स्‍वाधीन एवं स्वतंत्र-हृदय देश के लोगों के लिए, सूचना एक शक्ति है।उन्हें यह जानने का अधिकार है कि उन पर किस प्रकार शासन किया जा रहा है, सार्वजनिक धन कैसे खर्च किया जा रहा है, सार्वजनिक और राष्ट्रीय संसाधन का उपयोग कैसे किया जा रहा है, सार्वजनिक सेवाएं किस प्रकार उपलब्‍ध कराई जा रही हैं, और लोक निर्माण एवं कल्याण कार्यक्रम कैसे चलाए जा रहे हैं। लोकतंत्र में, अत्यधिक जानकारी जैसी कोई चीज नहीं होती। सूचना का अधिक होना, सूचना की कमी से हमेशा बेहतर है।

राष्ट्रपति ने कहा कि आरटीआई कोई एकल विधान नहीं है।यह कानून, भारतीय लोकतंत्र को मजबूत करने, प्रशासन की समस्‍त प्रणालियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और आम नागरिकों की क्षमता बढ़ाने के लिए उन्हें अच्‍छी तरह सूचना प्राप्‍त करके निर्णय लेने और चयन करने में सक्षम बनाने की बड़ी पहल का हिस्सा है।सबसे बढ़कर यह कि यह प्रयास, नागरिकों और शासन के बीच विश्‍वास के सामाजिक अनुबंध को पुष्‍ट करने का है - जहां दोनों को एक-दूसरे पर विश्वास हो। इसका एक संबंधित और समांतर निहितार्थ यह है किभ्रष्टाचार या अपव्‍यय की घटनाओं की रोक-थाम हेतु सार्वजनिक संसाधनों का तर्कसंगत उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

राष्ट्रपति ने कहा कि आरटीआई एक ऐसी विषय वस्तु का हिस्सा है जिससे नागरिकों को सेवाएं मुहैया कराने के साथ-साथ सार्वजनिक संसाधनों और वित्त के उपयोग में अधिक दक्षता आती है।इससे पारदर्शिता में सुधार आता है और पक्षपात एवं दुरूपयोग के बारे में उठने वाले संदेह दूर होते हैं। खनन क्षेत्रों की ई-नीलामी का काम आगे बढ़ाने के लिए इंटरनेट और डिजिटल अर्थव्यवस्था का उपयोग किया गया है।इनसे माल और सेवाओं की सार्वजनिक खरीद के लिए गवर्नमेंट ई-मार्केट या ‘जीईएम’ पोर्टल बनाने में मदद मिली है।और ‘जेएएम’ त्रिमूर्ति अर्थात् -जनधन खाते, आधार-आधारित विशिष्ट पहचान और मोबाइल फोन से योजनाओं के लाभार्थियों को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण में सहायता मिली है।

राष्ट्रपति ने कहा कि इन सभी से दक्षता को बढ़ावा मिल रहा है और अपव्‍यय की रोकथाम हो रही है। ये, भ्रष्टाचार के खिलाफ ढाल के रूप में कार्य करते हैं।ये सब नागरिक सशक्तिकरण, नागरिक सक्षमता और सार्वजनिक दक्षता की उसी संरचना का हिस्सा हैं जिनसे ‘सूचना का अधिकार’ को प्रेरणा मिली है।

राष्ट्रपति ने ‘सूचना का अधिकार’ और ‘गोपनीयता का अधिकार’ के बीच बारीक संतुलन पर भी जोर दिया।उन्होंने आरटीआई के मूल चार्टर को बनाए रखने के लिए सीआईसी की सराहना की; इस चार्टर में, राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे विषयों के कुछ अपवादों को छोड़कर सार्वजनिक अभिलेख, सार्वजनिक संवीक्षा के लिए उपलब्ध कराने की व्‍यवस्‍था है - लेकिन व्यक्ति विशेष के निजी अभिलेख किसीअन्‍य पक्ष की अनाधिकार जिज्ञासा से सुरक्षित रखे जाने होते हैं।उन्होंने कहा कि हमें ऐसे इक्‍का-दुक्‍का मामलों में सावधानी बरतनी चाहिए जो व्यक्तिगत रंजिश में आरटीआई तंत्र के दुरुपयोग का प्रयास करते हैं।विशेष रूप से ऐसे दौर में जब निजता के मुद़दे पर इतनी व्यापक बहस चल रही हो, तो इस संतुलन को बनाए रखना महत्वपूर्ण है।

यह विज्ञप्ति 1300 बजे जारी की गई।