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भारत के राष्ट्रपति ने हिमाचल प्रदेश विधान सभा के विशेष सत्र को संबोधित किया

राष्ट्रपति भवन : 17.09.2021

भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के लोगों ने विगत 50 वर्षों में विकास की जो गाथा लिखी है उस पर सभी देशवासियों को गर्व है।वे आज (17 सितंबर, 2021) शिमला में हिमाचल प्रदेश विधान सभा के विशेष सत्र को संबोधित कर रहे थे। यह विशेष सत्र हिमाचल प्रदेश राज्य के गठन की स्वर्ण जयंती के अवसर पर आयोजित किया गया है।

राष्ट्रपति ने कहा कि इस विकास यात्रा में हिमाचल प्रदेश की सभी पूर्ववर्ती सरकारों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्रियों - स्वर्गीय डॉक्टर वाई.एस. परमार, स्वर्गीय श्री ठाकुर राम लाल, श्री शांता कुमार, श्री प्रेम कुमार धूमल और स्वर्गीय श्री वीरभद्र सिंह - के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश की विकास-यात्रा को जन-मानस तक पहुंचाने की पहल अत्यंत सराहनीय है। हिमाचल प्रदेश ने विभिन्न क्षेत्रों में विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं। उन्होंने कहा कि नीति आयोग की एक रिपोर्ट के अनुसार, "सतत विकास लक्ष्य - भारत सूचकांक 2020-21" में हिमाचल प्रदेश देश में दूसरे स्थानपर है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश कई मापदंडों पर देश में अग्रणी राज्य है। उन्होंने इन उपलब्धियों के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार की सराहना की।

इस तथ्य की ओर इशारा करते हुए कि हिमाचल प्रदेश में नदियों का पानी निर्मल है, यहां की मिट्टी पोषक तत्वों से युक्त है, राष्ट्रपति ने यहां के किसान भाई-बहनों से आग्रह किया कि प्राकृतिक खेती को अधिक से अधिक अपनाएं और रासायनिक उर्वरकों से अपनी शस्य-श्यामला धरती को मुक्त करें।

राष्ट्रपति ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में पर्यावरण के अनुकूल कृषि, बागवानी, पर्यटन, शिक्षा, रोजगार- विशेषकर स्वरोजगार- आदि अनेक क्षेत्रों में सतत विकास की अपार संभावनाएं हैं। यह राज्य प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। इसलिए हमें प्राकृतिक सौंदर्य और सांस्कृतिक विरासत को संजोये रखने के साथ-साथ विकास के क्षेत्र में निरंतर प्रयास करने होंगे।

पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए सक्रिय कदमों का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि यह हिमाचल प्रदेश के लोगों और सरकार के लिए गर्व की बात है कि वर्ष 2014 में हिमाचल प्रदेश विधान विधानसभा देश की पहली पेपरलेस विधान सभा बन गई। यह टेक्नॉलॉजी के सक्षम उपयोग, पर्यावरण की रक्षा तथा आर्थिक संसाधनों की बचत का अच्छा उदाहरण है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के संरक्षण व संवर्धन के लिए राज्य सरकार ने प्लास्टिक के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने सहित, अनेक सराहनीय प्रयास किए हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश विधान सभा द्वारा पारित "Non-bio-degradable Garbage Control Act, 1995”, "Prohibition of Smoking and Non-smokers Health Protection Act, 1997” जैसे क़ानूनों का पूरे देश पर अच्छा प्रभाव पड़ता है। इस विधान सभा में ऐसे अनेक कानून बनाए गए हैं जिनसे भविष्योन्मुखी परिवर्तन के लिए मार्ग प्रशस्त होता रहा है।

हिमाचल प्रदेश के लोगों की प्रकृति के बारे में बोलते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के शांतिप्रिय परंतु बहादुर लोग, आवश्यकता पड़ने पर अन्याय, आतंक और देश की अस्मिता पर किसी भी प्रकार के प्रहार का वीरता-पूर्वक जवाब देते रहे हैं। उन्होंने बताया कि हिमाचल प्रदेश के लगभग हर गांव के युवा भारतीय सेनाओं में अपनी सेवाएं प्रदान करते हैं। उन्होंने इस बात को नोट किया कि राज्य में भूतपूर्व सैनिकों की संख्या एक लाख बीस हजार से भी अधिक है। उन्होंने कहा कि इस वीरभूमि से ब्रिटिश हुकूमत के विरुद्ध संघर्ष में प्राण न्योछावर करने वाले राम सिंह पठानिया, देश के पहले परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा, कारगिल में शहीद हुए, परमवीर चक्र से सम्मानित कैप्टन विक्रम बत्रा, परमवीर चक्र विजेता सूबेदार संजय कुमार और कारगिल के नायक शहीद कैप्टन सौरभ कालिया जैसे अनेक शूरवीरों ने पूरे देश का और हिमाचल प्रदेश का मस्तक ऊंचा किया है। उन्होंने कहा कि सैन्य-बलों का सुप्रीम कमांडर होने के नाते, कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से, उन वीरों की पावन स्मृति को मैं नमन करता हूं।

राष्ट्रपति ने यह भी उल्लेख किया कि आज सुबह प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को उनके जन्मदिन पर बधाई देते हुए जब राष्ट्रपति ने उन्हें इस समारोह के आयोजन बारे में बताया तो प्रधानमंत्री ने हिमाचल प्रदेश राज्य गठन के 50 वर्ष पूरे होने पर हिमाचल प्रदेश की जनता और सरकार को बधाई दी है।