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राष्ट्रपति ने कहा कि अपने बुनियादी ढांचे व संस्कृति के संगम से, देश के विकास का केन्द्र बनने की क्षमता नागपुर में है ।

राष्ट्रपति भवन : 22.09.2017

भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द ने आज (22सितम्बर, 2017) नागपुर में सुरेश भट्ट नाट्य सभागृह का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर, राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रपति का पदग्रहण करने के बाद,यह महाराष्ट्र की उनकी पहली यात्रा है। महाराष्ट्र बहुत से क्रांतिकारियों,समाज सुधारकों और संतों की ‘कर्मभूमि’रही है। राज्य के अनेकानेक क्षेत्रों और वर्गों में पैदा हुए महान सामाजिक और राजनीतिक नेताओं की एक लम्बी सूची है और उसमें शिवाजी महाराज,छत्रपति साहूजी, समर्थ गुरु रामदास,तात्या टोपे, संत एकनाथ,संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम, ज्योतिबा फूले, सावित्रीबाई फूले और पण्डित रमाबाई सरस्वती से लेकर गोपाल कृष्ण गोखले,बाल गंगाधर तिलक, डॉ. भीमराव अम्बेडकर,डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार, आचार्य विनोबा भावे, वाई.बी. चह्वाण और बाबा आम्टे तक महान हस्तियां शामिल हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि महाराष्ट्र स्वतंत्रता संघर्ष के प्रमुख केन्द्रों में से एक था।1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’सहित स्वतंत्रता आंदोलन के अधिकांश महत्वपूर्ण अध्याय महाराष्ट्र में लिखे गए। महात्मा गांधी गोखले को अपना गुरु माना करते थे और उन्होंने नागपुर मण्डल के वर्धा को अपनी कर्मभूमि बनाया।

राष्ट्रपति ने कहा कि महाराष्ट्र का न केवल देश के उद्योग और कारोबार का अपितु संस्कृति और कला का भी केन्द्र है। मुम्बई को भारत की आर्थिक राजधानी कहा जाता है। शिक्षा और संस्कृति की अपनी विरासत को व्यापार और प्रौद्योगिकी के साथ जोड़कर,महाराष्ट्र 21वीं शताब्दी में संपूर्ण देश को मजबूती प्रदान कर रहा है। विकास और आर्थिक बदलाव के प्रयास में,हमें अपनी सांस्कृतिक आधार-भूमि को अक्षुण्ण रखना है। इस संदर्भ में,महाराष्ट्र देश के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।

राष्ट्रपति ने नागपुर में आधुनिक बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में हो रहे तेज विकास की सराहना की। उन्होंने कहा कि नागपुर को एक स्मार्ट सिटी बनाने की परियोजना वहां चल रही है। पारस्परिक रूप से नागपुर को देश काभौगोलिक केन्द्र‘जीरो मील’माना जाता है और इस नगर में यह क्षमता मौजूद है कि यह भारत का विकास केन्द्र बन सके।

यह विज्ञप्ति 1810 बजे जारी की गई