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भारतीय वन सेवा के परिवीक्षाधीन अधिकारियों ने राष्‍ट्रपति से भेंट की

राष्ट्रपति भवन : 23.07.2018

भारतीय वन सेवा (2017 बैच) के एक समूह ने आज (23 जुलाई, 2018) राष्‍ट्रपति भवन में भारत के राष्‍ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्‍द से भेंट की।

परिवीक्षाधीन अधिकारियों को संबोधित करते हुए,राष्‍ट्रपति ने कहा कि विगत कुछ दशकों में, विश्व में पर्यावरणीय अपकर्ष, वन क्षेत्र में कमी और सबसे बढ़कर जलवायु परिवर्तन पैदा करने वाली वैश्विक ताप बढ़ोत्‍तरी से प्राणियों के अस्तित्व के प्रति उभर रहा खतरा महसूस किया गया है। 21वीं शताब्दी में पर्यावरण संरक्षण हमारी चिंता का एक प्रमुख कारण बन गया है और वन इस चिन्‍ता के समाधान का अभिन्न अंग हैं।

राष्‍ट्रपति ने कहा कि वनों की सुरक्षा के लिए,विशेषकर भारत में, उन लोगों को भागीदारी और सहयोग के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए जिनकी आजीविका वनों पर निर्भर है।हमारे देश के वनों में और उनके आसपास बड़ी संख्या में जनजातियों सहित अत्यंत गरीब लोग रहते हैं। वे वनों से ही भोजन, ईंधन के लिए लकड़ी और चारे जैसी अपनी मूलभूत जरूरतों को पूरा करते हैं। वे अपनी परम्‍पराओं और मान्‍यताओं के तौर पर वनों का सम्‍मान करते हैं। वनों की रक्षा के किसी भी उपाय में इन लोगों की बुनियादी जरूरतों का ध्‍यान रखा जाना चाहिए और उन्हें साझेदारों के रूप में इस कार्य में शामिल किया जाना चाहिए।

राष्‍ट्रपति ने कहा कि हमारे द्वारा अपनाया गया संयुक्त वन प्रबंधन मॉडल ‘देखभाल और साझेदारी’ के सिद्धांत पर आधारित है। इसमें वनों के प्रबंधन में स्थानीय लोगों और समुदायों के साथ साझेदारी की परिकल्पना की गई है। भारतीय वन सेवा के अधिकारियों को वन प्रबंधन में इन समुदायों को शामिल करना चाहिए तथा मानवीय और सह्दयतापूर्ण रवैए के साथ वानिकी के वैज्ञानिक सिद्धांतों को अमल में लाना चाहिए। ऐसा करके ही सतत और प्रभावी समाधान प्राप्त हो सकेंगे।

यह विज्ञप्ति 1400 बजे जारी की गई।