Back

भारत के राष्ट्रपति कानपुर में चौधरी हरमोहन सिंह यादव की जन्मशती समारोह में शामिल हुए

राष्ट्रपति भवन : 24.11.2021

भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द ने आज (24 नवंबर, 2021) कानपुर में चौधरी हरमोहन सिंह यादव के जन्मशती समारोह में भाग लिया और वहां सभा को संबोधित किया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि चौधरी हरमोहन सिंह यादव का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए अनुकरणीय है। वे सादगी और जन-सेवा का उत्तम उदाहरण हैं। वे हर स्तर पर लोगों, विशेषकर किसानों के जीवन में खुशहाली लाने के लिए प्रयत्नशील रहे। विधान-सभा से लेकर राज्य-सभा तक में खेती-किसानी के बारे में उनके विचारों को बहुत गंभीरता से सुना जाता था।

राष्ट्रपति ने कहा कि श्री हरमोहन सिंह के घर के दरवाजे सभी के लिए खुले रहते थे। वर्ष 1984 में, उन्होंने सांप्रदायिक सौहार्द का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। अपनी जान जोखिम में डालकर भी उन्होंने उन्मादी भीड़ का डटकर मुकाबला किया और बड़ी संख्या में लोगों की प्राण-रक्षा की। वर्ष 1991 में, असाधारण वीरता और निडरता के लिए उन्हें ‘शौर्य-चक्र’ से सम्मानित किया गया।

राष्ट्रपति ने कहा कि हरमोहन सिंह जी के प्रयासों से इस क्षेत्र में अनेक शैक्षिक संस्थानों की स्थापना की गई, जिनसे इस क्षेत्र में शिक्षा के प्रसार को बढ़ावा मिला। वे यह जानते थे कि शिक्षाहर परिवार की, हर समाज की प्रगति का आधार होती है।राष्ट्रपति ने उनकी कही बातों का स्मरण करते हुए बताया कि वे यह भी समझते थे कि शिक्षा दूसरों के जीवन में सुधार लाने और अपने समाज को, अपने देश कोबेहतर बनाने का सर्वश्रेष्ठ साधन है।

राष्ट्रपति ने कहा कि हमारी आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष में इस समय पूरे देश में ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ मनाया जा रहा है। दो वर्ष तक चलने वाले इस महोत्सव के दौरान हम स्वाधीनता संग्राम के उन गुमनाम सेनानियों के योगदान का स्मरण करेंगे जिन्होंने अपने प्राणों की आहुति दे दी थी। इस अवसर पर अजीजन बाई, मैनावती, जयदेव कपूर, शिव वर्मा, बिजय कुमार सिन्हा और डॉ. गया प्रसाद जैसे स्वतंत्रता सेनानियों को याद करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसे अनेक स्वाधीनता सेनानियों के महत्वपूर्ण योगदान से भारत को स्वतंत्रता प्राप्त हो सकी थी। इसलिए, हम सबका कर्तव्य है कि ऐसे गुमनाम स्वाधीनता सेनानियों के योगदान के बारे में जानकारी लोगों के सामने लाई जाए।

राष्ट्रपति ने कहा कि किसी भी राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की नींव, अतीत के अनुभव और पूर्वजों की विरासत से मजबूती प्राप्त करती है। एक सुदृढ़, यशस्वी, विकसित और समृद्ध भारत के निर्माण में हम सब की सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए। हमारे देश का हर एक हाथ - देश की उन्नति में एक साथ उठना चाहिए।