Back

भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द का कारेलीबाग श्री स्वामीनारायण मंदिर में आयोजित युवा शिविर में वर्चुअल संबोधन

21.05.2022

Download PDF

समाज के उत्थान और राष्ट्र की प्रगति में युवाओं की महती भूमिका होती है और युवा पीढ़ी के जीवन को निर्व्यसनी एवं सुचारु बनाने के लिए उन्हें शिक्षित करने तथा समय-समय पर मार्गदर्शन देते रहने की आवश्यकता होती है। अत:, भारतीय वैदिक सनातन संस्कृति के जीवन-मूल्यों को युवा पीढ़ी में प्रस्थापित करने के पावन एवं कल्याणकारी उद्देश्य से आयोजित इस विराट युवा शिविर को संबोधित करते हुए मुझे बहुत प्रसन्नता हो रही है।

मुझे बताया गया है कि बच्चों और युवाओं में, आरंभ से ही नैतिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों का संचार करने के लिए, श्रद्धेय श्री ज्ञानजीवन दासजी स्वामी की प्रेरणा से श्री स्वामीनारायण मंदिर में, इस प्रकार के प्रशिक्षण शिविरों का नियमित आयोजन किया जाता है। यह जानकर मुझे विशेष प्रसन्नता हुई है कि पिछले चालीस वर्षों में कथा, प्रवचन और देश- विदेश में विचरण करते हुए स्वामीजी ने एक चरित्रवान समुदाय तैयार किया है। भगवान स्वामीनारायण की शिक्षाओं एवं उपदेशों से आकर्षित होकर आज 100 से अधिक त्यागी संत और लाखों मुमुक्षु स्वामीजी का शिष्यत्व प्राप्त कर आध्यात्मिक साधना करते हुए देश और समाज की सेवा कर रहे हैं।

आदरणीय संत-गण और मुमुक्षु-गण,

मंदिर और आश्रम जहां हमारी आस्था और जीवन-निर्माण के केन्द्र होते हैं वहीं, दरिद्रनारायण की सेवा एवं रोगियों के कष्ट-निवारण के माध्यम से वे राष्ट्र-सेवा के केन्द्र भी होते हैं। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि कुंडलधाम श्री स्वामीनारायण मंदिर ने कुदरती आपदा में बेसहारा लोगों को सहायता देकर, गरीबों को नि:शुल्क भोजन व दवाइयां देकर तथा कोविड-19 की महामारी के समय असंख्य रोगियों की सेवा के लिए मंदिर को कोविड हॉस्पिटल में तबदील करके राष्ट्र-सेवा का एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। इन विशेष प्रयासों के लिए श्री स्वामी जी और श्री स्वामीनारायण मंदिर से जुड़े सभी लोग सराहना के पात्र हैं।

आज से लगभग 200 वर्ष पहले, भगवान श्री स्वामीनारायण ने, धर्म-प्रतिष्ठा के लिए तीन प्रमुख संकल्प लिए थे। उनका पहला संकल्प था-

मंदिर करवा मोटा अति, मूर्तियो बेसाडु माय;

सुगम सहु नर-नार ने, पूजे स्पर्शे लागे पाय।।

अर्थात् मंदिरों की स्थापना करना और उनमें दिव्य मूर्तियों की स्थापना करना, जिससे सभी पुरुष और नारियां भगवान के चरण कमलों का स्पर्श करके सुगमता से पूजा-आराधना कर सकें।

उनका दूसरा संकल्प था- आचार्य पद की प्रतिष्ठा करना और तीसरा था- श्री स्वामीनारायण संप्रदाय की महत्ता के चित्रण के लिए पवित्र ग्रंथों की रचना करना।

श्री ज्ञानजीवन दासजी स्वामी के प्रयासों से कुंडलधाम में, भगवान स्वामीनारायण के तीनों संकल्पों का अनुसरण होता दिखाई दे रहा है। वहीं देश, काल और परिस्थितियों की मांग के अनुसार, ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ ‘आत्म-निर्भर भारत’ और ‘स्वच्छ भारत’ जैसे अनेक प्रकल्पों पर भी काम किया जा रहा है। मुझे बताया गया है कि भगवान स्वामीनारायण के जीवन, विचारों और उपदेशों के संकलन ‘श्रीमद् हरि-चरितामृत सागर’ को टाइटेनियम प्लेटों पर उत्कीर्ण कराया गया है। इस प्रकार तैयार यह अमर ग्रंथ 10 हजार वर्ष तक नष्ट नहीं होगा। अपनी विरासत को भावी पीढ़ियों के लिए सहेजने और उन तक पहुंचाने के प्रयासों का यह अनुपम उदाहरण है। आज का समय, उन्नत सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी का समय है। हमारे युवागण, बाल्यावस्था से ही टैक्नोलॉजी से जुड़ने और उसका प्रयोग करने में सहज महसूस करते हैं। श्री ज्ञानजीवन दासजी स्वामी, ‘बदलते समय के अनुरूप स्वयं में बदलाव लाने’ में विश्वास करने वाले हैं। इसलिए, उन्होंने भगवान स्वामीनारायण की विभिन्न चेष्टाओं को थ्री डी एनीमेशन के माध्यम से तैयार कराया और वितरित कराया। टैक्नोलॉजी तथा आध्यात्मिकता का यह संगम, भक्तजनों एवं युवाओं में विशेष रूप से लोकप्रिय सिद्ध हुआ है। स्वामीजी की भविष्य-दृष्टि का यह एक उत्तम उदाहरण है।

प्रिय युवा साथियो,

भारत की पारंपरिक ग्रामीण जीवन-प्रणाली, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से जूझ रहे विश्व समुदाय को मार्ग दिखाती रही है। पर्यावरण की रक्षा करके और प्रकृति के साथ आत्मीय भाव से व्यवहार करके हम सब अपनी धरती को बचाए रख सकते हैं। अपनी नदियों की, तालाबों की, वृक्षों की, बीजों की, गोवंश की और सभी प्राणियों की रक्षा करके मानव-जाति की भी रक्षा की जा सकती है। मुझे बताया गया है कि मंदिर के विशाल प्रांगण में स्थापित श्री गोपीनाथ जी गौशाला में लगभग 300 गीर गोवंश का भी पालन-पोषण किया जाता है। इसी प्रकार, कुंडलधाम को अपने अमृत जल से सिंचित करने वाली उतावली नदी को संरक्षित करने के साथ-साथ समूचे परिसर में 22,000 से अधिक वृक्षों का पोषण किया जा रहा है। मंदिर की यह पहल प्रशंसनीय है।

गुजरात ने जहां देश के समक्ष औद्योगिक प्रगति की झांकी प्रस्तुत की है, वहीं प्राकृतिक खेती एवं जीरो बजट कृषि का उदाहरण भी सामने रखा है। कुंडलधाम श्री स्वामीनारायण मंदिर ने अपने विशाल परिसर में जैविक खेती को प्रोत्साहन दिया है और सुंदर औषधवाड़ी का भी निर्माण किया है। मुझे यह जानकर विशेष प्रसन्नता हुई है कि औषधवाड़ी में पैदा होने वाली आयुर्वेदिक एवं हर्बल औषधियाँ जरूरतमंदों के बीच नि:शुल्क वितरित की जाती हैं। समाज-सेवा की इस प्रकार की मिसाल पूरे देश के आस्था-स्थलों के लिए अनुकरणीय है।

देवियो और सज्जनो,

मेरे लिए यह अत्यंत सुखद अनुभूति है कि श्रद्धेय श्री ज्ञानजीवन दासजी स्वामी और श्री स्वामीनारायण मंदिर ने युवाशक्ति से जुड़े इस विशेष आयोजन में आप सबके बीच अपने विचार रखने का अवसर मुझे प्रदान किया। मेरी कामना है कि भगवान श्री स्वामीनारायण जी की ‘शिक्षापत्री’ में निहित शिक्षाओं का अनुसरण करते हुए आप सब लोग, देश की प्रगति में योगदान करें। आप सबका भविष्य उज्ज्वल हो और आपका जीवन मंगलमय हो।

धन्यवाद,

जय हिंद!