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भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द का परौंख में सम्बोधन

परौंख :03.06.2022

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मुझे प्रसन्नता है कि मेरे निमंत्रण पर प्रधानमंत्री जी मेरे पैतृक गांव पधारे हैं। इसके लिए, प्रधानमंत्री जी! मैं, अपनी ओर से और यहां एकत्रित सभी लोगों की ओर से आपका हार्दिक स्वागत करता हूं।

प्रधानमंत्री जी! आप हमारे इस छोटे से गांव में जनता-जनार्दन से मिलने के लिए यहां आए हैं, यह आपकी सहृदयता भी है और उदारता भी है।

आज न केवल मेरा गांव आपका ऋणी हो गया है बल्कि मेरा जिला भी अनुग्रहीत हो गया है।

प्रधानमंत्री जी! उत्तर प्रदेश तो हमारे लोकतन्त्र की सर्व-समावेशी शक्ति के प्रति आपकी निष्ठा का उसी दिन कायल हो गया था जिस दिन इस राज्य के एक गरीब परिवार में जन्मे मुझ जैसे व्यक्ति को राष्ट्रपति पद की ज़िम्मेदारी देने की पहल आपके द्वारा की गई।

उत्तर प्रदेश के लोगों को सदैव इस बात की टीस रहती थी कि इस राज्य ने देश को नौ-नौ प्रधानमंत्री दिए लेकिन राष्ट्रपति एक बार भी नहीं। लेकिन आज उत्तर प्रदेश के लोगों को गर्व की अनुभूति होती है कि यहां के एक निवासी को पहली बार देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद का उत्तरदायित्व प्रदान किया गया। और इसका श्रेय प्रधानमंत्री जी! आपको जाता है।

इसे मैं पूरे देश का सौभाग्य मानता हूं कि प्रत्येक नागरिक के जीवन को सरल व सुखमय बनाने के लिए प्रधानमंत्री जी सतत प्रयत्नशील रहते हैं। उन्होंने भारत माता की सेवा करने के अर्थ को नए आयाम दिए हैं। उन्होंने, राष्ट्र सेवा और जन कल्याण की अवधारणा को नई सार्थकता प्रदान की है।

बहनो और भाइयो,

इस बात का मैं विशेष उल्लेख करना चाहूंगा कि यहां आप सबके बीच आने से पहले प्रधानमंत्री जी ने गांव का भ्रमण किया। उन्होंने माता पथरी देवी के मंदिर में पूजा अर्चना सम्पन्न की। लेकिन वे बाबासाहब डॉक्टर आंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करना और उनको सादर नमन करना नहीं भूले।

इस प्रकार, प्रधानमन्त्री जी ने बाबासाहब के आधुनिक भारत के निर्माण के संकल्प के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है। बाबासाहब यह मानते थे कि हमारे लोकतन्त्र की जड़ें हमारे देश की प्राचीन परम्पराओं से ही अपनी जीवनी-शक्ति प्राप्त करती हैं। हम सभी जानते हैं कि भारतीय संस्कृति पर आधारित समावेशी तथा समरस समाज के निर्माण तथा गरीब, पिछड़े और वंचित वर्गों के उत्थान के प्रति बाबासाहब जीवन भर संघर्षरत रहे। उनके आदर्शों को जिस प्रकार प्रधानमंत्री जी ने कार्यरूप दिया है वह हम सबके लिए अनुकरणीय भी है और अपने आप में एक मिसाल भी है।

प्रधानमंत्री जी! आपको यह जानकर शायद आश्चर्य होगा कि आज से लगभग 50-55 वर्ष पहले हमारे इस गांव में पहली बार किसी राष्ट्रीय स्तर के नेता का आगमन हुआ था: और वे नेता थे डॉक्टर राम मनोहर लोहिया जी। मुझे आज भी याद है कि मेरी ही तरह गांव के बहुत से लोगों ने पहली बार जीप देखी थी, जिस पर लोहिया जी आए थे। इसलिए, आज आपके यहां आगमन से मेरे गांव तथा आस-पास के क्षेत्र के लोग एक दुर्लभ ऐतिहासिक घटना के साक्षी बन रहे हैं।

भाइयो और बहनो,

मैं जब भी यहां, अपने गांव में आता हूं तो सहज ही मैं यहां की माटी को अपने माथे से लगाता हूं। शायद इस बात से सभी लोग सहमत होंगे कि प्रत्येक व्यक्ति के हृदय में – चाहे वह छोटा हो या बड़ा, साधारण हो या असाधारण – उसमें अपनी मां और मातृभूमि के प्रति विशेष अनुराग व श्रद्धा का भाव जीवन-पर्यंत बना रहता है। मातृ-शक्ति के लिए यह विशेष अनुराग व आदर का भाव मैंने प्रधानमंत्री जी के जीवन में भी देखा है। मैं मानता हूं कि आज मैं जो कुछ भी हूं, जहां पर भी हूं, वह शुभचिंतकों की शुभेच्छाओं के साथ-साथ अपनी मातृभूमि के आशीर्वाद के बल पर ही संभव हो सका है। मैं तो यह भी मानता हूं कि मेरे इस गांव की मिट्टी की ही वह ताकत है और आप सबका प्रधानमंत्री जी के लिए अपार स्नेह है जिसने प्रधानमंत्री जी को भी यहां बुला लिया।

बहनो और भाइयो,

मुझे बताया गया है कि इस गांव के और आस-पास के क्षेत्र के निवासियों के हित में, स्थानीय प्रशासन द्वारा अनेक जन-सुविधाओं तथा कल्याणकारी कार्यों को सम्पन्न किया गया है। ऐसे जन-हितैषी कार्यों के लिए मैं राज्य सरकार तथा स्थानीय प्रशासन की सराहना करता हूं। आज के इस कार्यक्रम को सफलता पूर्वक सम्पन्न करने में राज्य सरकार व स्थानीय प्रशासन के जिन लोगों ने निष्ठा के साथ प्रयास एवं परिश्रम किया है उन सबके लिए मैं विशेष प्रशंसा व्यक्त करता हूं।

अंत में, प्रधानमंत्री जी की दृढ़ इच्छा शक्ति का मैं जरूर उल्लेख करना चाहता हूं। अभी हाल ही में, अपनी जापान यात्रा के दौरान, वहां बसे भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री जी ने कहा था कि उन्हें मक्खन पर नहीं बल्कि पत्थर पर लकीर खींचना अच्छा लगता है। प्रधानमंत्री जी के चरित्र की यही दृढ़ता आज भारत की शक्ति को विश्व पटल पर नए रूप में स्थापित कर रही है। उन्होंने अपने असाधारण पुरुषार्थ और परिश्रम के बल पर राष्ट्र की अस्मिता और गरिमा को भव्यता प्रदान की है। भारत माता के ऐसे सपूत पर हम सभी देशवासियों को गर्व है।

प्रधानमंत्री जी! आप मेरे पैतृक गांव में पधारे। इसके लिए मैं एक बार फिर आपको हृदय से धन्यवाद देता हूं।

आप सभी लोग इतने उत्साह के साथ इतनी बड़ी संख्या में प्रधानमंत्री जी को सुनने के लिए यहां आए इसके लिए आप सबको भी बहुत-बहुत धन्यवाद।

जय हिन्द!