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भारत के राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविन्द का आईआईटी दिल्ली के दीक्षांत समारोह पर संबोधन

नई दिल्ली : 04.11.2017

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1. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली के 48वें दीक्षंत समारोह को संबोधित करना मेरे लिए सौभाग्य की बात है। राष्ट्रीय महत्व की इस सस्था के अध्यक्ष के रूप में मैं आपके बीच आ कर खुश हूं। 2017 में स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण करने वालों के लिए यह अवसर आपके कैरियर में एक बड़ी शुरूआत है। मैं आप सबको बधाई देता हूं। आप सब कैरियर की उत्सुकता से अवसरों की दुनियां में इतने अहम परिसर को छोड़कर जा रहे हैं।

2. दर्शकों का एक ऐसा समूह है जो बधाई का पात्र है; वह हैं आपके परिवार। उन्होनें आपकी सफलता के लिए त्याग किया है। उन्होंने आपके पूरे परिश्रम में आपको भावनात्मक और वित्तीय सहायता पहुंचाई है। इस दीक्षांत समारोह में आपकी उपस्थिति आपके प्रयास और आपके अभिभावकों की तपत्या दोनों का परिणाम है।आज वे इस दीक्षांत में केवल उपस्थित ही नहीं होंगे बल्कि वे इस परिसर का भ्रमण भी करेंगे जहां उनके बच्चों ने पढ़ाई की, और प्रोफेसरों से मिलेंगे। यह उनके लिए एक विशिष्ट समय होगा।

मुझे विश्वास है कि केवल टेक्नोसिटी का शीघ्र विकास ही इस प्रक्रिया को तीव्र कर देगा।

3. छात्रों को स्नातक बनाने की सफलता आईआईटी, दिल्ली की फैकल्टी को श्रद्धांजली भी है जो हमारा देश सर्वोत्तम रूप से दे सकता है। उन्होंने नए युवाओं को परिपक्व व्यावसायिकों के रूप में ढाला है। मेरी शुभकामनाएं उनके साथ हैं।

4. मित्रो, सामान्य रूप से आईआईटी प्रणाली और विशेषरूप से आईआईटी, दिल्ली हमारे देश में तकनीकी शिक्षा का स्वर्ण स्तर रहा है। आईआईटी के पूर्व छात्र भारत की इंजीनियरिंग क्षमताओं, इसके आईटी उद्योग और हमारी स्टार्ट अप संस्कृति का आधार रहे हैं। वे भारतीय बौद्धिकता और प्रौद्यागिकी ताकत का पूरे विश्व में, सिंगापुर से सिलीकॉन वैली तक ब्रांड ऐम्बेसडर रहे हैं।

5. आईआईटीज की स्थापना 1950 और 1960 के दौरान एक उपनिवेशवाद से उत्पन्न संसाधन-ललायित देश में की गई थी। उस स्तर पर हम अपने तकनीकी और बौद्धिक संसाधनों को बड़ी उत्सुकता से समेकित करना चाहते थे। जैसे ही भारत का विकास हुआ, भारत में आईआईटी प्रणाली ही विकसित हुई। इसने सबसे पहला ध्यान स्नातकाधीन स्तर पर प्राथमिक रूप से सुशिक्षित इंजीनियर पैदा करने पर था। मुझे प्रसन्नता है कि आज इन संस्थानों का अधिकतम ध्यान अनुसंधान और विकास पर भी है।


6. मैं समझता हूं कि आईआईटी दिल्ली में अब अधिक स्नातकाधीन स्तर से अधिक स्नातकोत्तर छात्र हैं। यह एक अच्छा संकेत है। हम अनुसंधान आधारित शिक्षा की ओर बढ़ रहे हैं और राष्ट्र निर्माण के लिए उत्पादन और प्रौद्योगिकियों की तलाश कर रहे हैं। मुझे यह जानकर खुशी है कि आईआईटी, दिल्ली में अनुसंधानकर्ताओं ने ऐसे उत्पाद विकसित किए हैं जिन्होंने देश के नागरिकों को खुशहाल बनाने में योगदान दिया है। उदाहरणय के लिए :

I. आईआईटी द्वारा विकसित नैनो फिल्टर्स हमें बढ़ते हुए वायु प्रदूषण से बचाता है और इसकी कीमत केवल 10 रुपए है।

II. ट्रूएचबी हैमोमीटर एक हेमोग्लोबिन को मापने वाला उपकरण है जिसकी कीमत बहुत कम है, जो आसानी से सुलभ है और लाने ले जाने में भी आसान है। इसकी सटीकता 99 प्रतिशत है और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान द्वारा प्रमाणित है।

III स्मार्ट केन दृष्टिवाधित लोगों के लिए एक सामान्य केन का स्मार्ट रूप है। अल्ट्रासानिक टेक्नोलोजी के उपयोग से यह आरामदेह और सुरक्षात्मक रूप से चलने फिरने में मदद कर सकती है।

IV. क्लैंस्टा एक ऐसा उपकरण है जो बिना पानी के नहाने के लिए उपयोग किया जाता है। यह सफाई बनाए रखने में मदद करता है और जल की अनुलब्धता में हमें स्वच्छ रखने में सहायक है।

7. इनके अतिरिक्त मुझे बताया गया है कि आईआईटी, दिल्ली के पास पाइप लाइन में डाटा विज्ञान में बड़े-बड़े नवोन्वेश हैं। यह टेक्नोलोजी का एक उभरता हुआ क्षेत्र है। आपके संस्थान हमारे लोगों के कमजोर वर्गों और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के लाभ के लिए इस नए ज्ञान को लागू करने के लिए पूरी तरह से तैयार है।

8. इसके अतिरिक्त रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेन्स में अग्रिमता और चौथी औद्योगिक क्रांति हमारे समाज और कार्यस्थल में परिवर्तन ला रहे हैं। वे इंजीनियरिंग के अनेक क्षेत्रों को चुनौती भी दे रहे हैं। यह आईआईटी जैसे संस्थानों को उनके उन्नयन और अद्यतन के लिए प्रेरित कर रहा है और यह हमारी नई प्रौद्योगिकियों की खोज में हमारे समाज के दिशासूचकों के रूप में आईआईटीज की भूमिका पर पुन: दबाव देता है, और हमारी अर्थव्यवस्था, समाजिक और आचार-विचार के लिए उनके प्रयोग को समझता है।

9. मैंने आईआईटीज के तकनीकी और आर्थिक प्रभावों का संदर्भ दिया है परन्तु आईआईटी और उन स्थानों का जिनमें वे भारतीय कल्पना में रहते हैं की सामाजिक भूमिका भी है। पूरे देश के नवोदय विद्यालयों में से हमारे पास 50 से अधिक छात्र हैं, जिन्हें उनके शैक्षिक रिकार्ड और मेरिट के आधार पर चुना गया है। वे स्नातक पर बातचीत करते हैं, संकाय से मिलते हैं और प्रयोगशालाओं का दौरा करते हैं। मुझे विश्वास है कि उनमें से कुछ आईआईटी फ्रेशर्स के रूप में आगामी वर्षों में लौटेंगे।

10. मुझे यह जानकर खुशी हुई है कि दीक्षांत के रनअप तक आईआईटी, दिल्ली समुदाय चार रक्तदान के कैम्प आयोजित कर चुका है। जैसा कि मैंने पहले कहा है, हम सब अपने छोटे-छोटे रूप में समाज को अपना योगदान दे सकते हैं-और रक्तदान करना सबसे सरल और आसन तरीका है। मैं आईआईटी, दिल्ली प्राधिकारियों और समुदाय से एक स्कूल का चयन करने और उसका साथ देने का आग्रह करूंगा और यह देखने के लिए भी कहूंगा कि वे किस प्रकार इसके विकास और इसके शिष्यों की क्षमता निर्माण में योगदान देते हैं।

11. आईआईटी, दिल्ली जैसे संस्थान शिक्षा के केन्द्र ही नहीं हैं बल्कि वे सामुदायिककेन्द्र हैं। आईआईटी दिल्ली समुदाय का एक केंद्रीय घटक इसके पूर्व छात्रों का संगठन है। मैं आई आईटी दिल्ली के उन चार छात्रों को बधाई देता हूं जिन्हें आज जीवन के भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया जात रहा है। अपने सहपाठियों की तरह, उन्होंने देश और विश्व में विभिन्न क्षेत्रों में योगदान दिया है-शिक्षा और अनुसंधान में; व्यवसाय और कार्पोरेट क्षेत्र में; और सरकार और सार्वजनिक सेवा में। उनमें से प्रत्येक पर न केवल आईआईटी दिल्ली को बल्कि हम सभी को गर्व है।

12. दुनिया के सभी महान विश्वविद्यालयें में पुराने छात्रों और संस्था के बीच एक गहरी और सफल भागीदारी है। वे पूर्व छात्रों को न केवल वित्तीय सहायता के संदर्भ में आमंत्रित करते हैं बल्कि ज्ञान साझा करने और समय के संदर्भ में भी योगदान करते हैं।

13. आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्र समूह के मामले में, यह कई मायनों में किया जा सकता है। उन लोगों में से अनेक, जिन्होंने विगत में पढ़ाई की है, को उनकी विश्वस्तरीय शिक्षा करदाता द्वारा भारी सब्सिडी दी जाती थी। वापस भुगतान करना और वंचित लोगों की सहायताकरना एक नैतिक दायत्वि है, जिस रूप में भी व्यक्ति पसंद करता है। निश्चय ही यह सबसे बच्छा होगा अगर हमारे समाज के जमीनी स्तर पर समाज को लौआने की प्रक्रिया शिक्षा और छात्रवृत्ति की परंपरा को और अधिक समृद्ध करे।

14. आईआईटी दिल्ली के अधिकारियों का दायित्व है कि वे पूर्व छात्रों, जिनमें से कई अन्य विश्वविद्यालयों या उद्योगों में अच्छे स्थानों पर कार्यरत हैं उन्हें वापिस आने और पढ़ाने के लिए आमंत्रित करें-भेले ही थोड़े समय के लिए या विशिष्ट पाठ्यक्रमों के लिए। यदि ऐसा करने के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने की आवश्यकता है, तो उस दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए।

15. अंत में, मैं एक बार फिर 2017 के स्नातक हो रहे छात्रों की सराहना करता हूं और आप सबको एक खुख, चुनौतीपूर्ण और कामयाब भविष्य के लिए हर शुभकामनाएं देता हूं। विशेष रूप से, मैं इस दीक्षांत समारोह में पुरस्कार विजताओं को बधाई देता हूं।

16. इन शब्दों के साथ, मैं आईआईटी दिल्ली इसके संकाय और पूर्व छात्र, और इसके स्नातकों से आग्रह करता हूं कि वे देश के निर्माण और हमारे समाज के विकास और कल्याण के रास्ते पर निरन्तर आगे बढ़ते रहें।