Back

वियतनाम की नेशनल असेंबली में भारत के राष्ट्रपति, श्री रामनाथ कोविन्द का संबोधन

हनोई : 20.11.2018

Download PDF

1. नेशनल असेंबली और इसके माध्यम से वियतनाम की जनता को संबोधित करना मेरे लिए सम्मान की बात है। मुझे यहाँ आमंत्रित करने के लिए, मैं आपके देश के सभी क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाली इस असेंबली के सभी सदस्यों को और विशेष रूप से चेयरपर्सन महोदया को धन्यवाद देना चाहता हूं। साथ ही, पिछले दो दिनों में मेरे और मेरे प्रतिनिधिमंडल के शानदार अतिथि सत्कार के लिए राष्ट्रपति नुयेन फु त्रुंग और वियतनाम के लोगों तथा सरकार का भी धन्यवाद करता हूंl

2. भारत के लिए, सभी राजनयिक संबंध महत्वपूर्ण हैं लेकिन कुछ रिश्ते विशेष होते हैं। वियतनाम के साथ हमारी मैत्री निश्चित रूप से विशेष है। आसियान और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में वियतनाम वह पहला देश है, जहां मैं भारत के राष्ट्रपति के रूप में अपनी यात्रा पर आया हूं। वास्तव में, मेरी यह यात्रा भारत से पूर्व दिशा की ओर किसी भी राष्ट्र की मेरी पहली राजकीय यात्रा है। वियतनाम हमेशा हमारे दिलो-दिमाग में रहता है। यह भारत की "एक्ट ईस्ट" नीति में बहुत महत्वपूर्ण स्‍थान रखता है।

3. दो देशों के बीच जुड़ाव की ताकत का पता, उनके द्विपक्षीय यात्रा कैलेंडर से चलता है। चार साल पहले, मेरे पूर्ववर्ती, राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी वियतनाम आए थे। दो साल बाद, 2016 में, हमारे प्रधानमंत्री, श्री नरेन्द्र मोदी, अपनी ऐतिहासिक यात्रा पर यहाँ पहुंचे, जिससे हमारे संपर्क मजबूत होकर व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदल गए। वर्ष 2018 और भी अधिक ख़ास रहा है। जनवरी में, मुझे अपने गणतंत्र दिवस समारोह में प्रधानमंत्री नुयेन जुन का स्वागत करने का अवसर मिला, जिसमें उन्होंने अन्य आसियान देशों के नेताओं के साथ मुख्य अतिथिके रूप में शिरकत की थी। मार्च में, हमें दिवंगत राष्ट्रपति त्रान दाई क्वांग की मेजबानी करने का सौभाग्य मिला। उनका आकस्मिक निधन हम सभी के लिए बहुत पीड़ा दायक था। वह एक महान देशभक्त और भारत-वियतनाम संबंधों के उत्कट पैरोकार थे। मैं सरकार और भारत के लोगों की ओर से, और साथ हीअपनी ओर से भी शोक संवेदना व्यक्त करता हूं।

4. मैं इस अवसर पर महासचिव और राष्ट्रपति नुयेन फुत्रुंग को पार्टी और नेशनल असेंबली द्वारा उनमें व्‍यक्‍त किए गए भारी विश्वास और उनके द्वारा वियतनाम के राष्ट्रपति की जिम्मेदारी स्वीकार किए जाने पर बधाई देता हूँ। मुझे विश्वास है कि उनके समर्थन, मार्गदर्शन और नेतृत्व में भारत-वियतनाम संबंध समृद्ध होंगे।

5. वियतनाम के साथ भारत के जुड़ाव के कई पहलू हैं। हमारे बीच व्यापार, राजनीति और लोगों से लोगों के बीच मजबूत सम्बन्ध हैं। इस असेंबली के सदस्य के रूप में, आप हमारे बीच होने वाले संसदीय दौरों से अवगत होंगे। हमारे दोनों देश प्राचीन समुद्री राष्ट्र हैं और भारत-प्रशांत क्षेत्र के वाणिज्य, सुरक्षा और स्थिरता में हितधारी हैं। इन सबसे बढ़कर, हमारे जीवन मूल्य एक जैसे हैं। हमारे संस्थापक महापुरुषों ने हमें वही सपने देखना सिखाया - हमारे सपने हमारे अपने लिए हैं, एक-दूसरे के लिए हैं, दुनिया के किसी भी क्षेत्र में स्थित औपनिवेशिक युग के बाद बने देशों के लिए हैं, और ये सपने हमारे भविष्य के लिए तथा हमारे बच्चों के लिए हैं।

6. मैं यह भी बताना चाहूंगा कि वर्ष 2019 बहुत महत्वपूर्ण वर्ष है। भारत में, यह महात्मा गांधी की 150वीं जयंती का वर्ष है और वियतनाम में इसे महान हो ची मिन्ह के निधन की 50वीं वर्षगांठ के रूप में मनाया जा रहा है। इन क्रांतिकारी महापुरुषों ने हमारे देशों को राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। वे न केवल वियतनाम और भारत के लिए बल्कि पूरे एशियाई महाद्वीप और वैश्विक समुदाय के लिए प्रेरणा स्रोत बने हुए हैं। आने वाला वर्ष एक बार फिर इन दो उल्लेखनीय व्यक्तित्वों को परस्‍पर जोड़ता है, और हमारे देशों को एकजुट करता है।

7. गांधीजी और राष्ट्रपति हो ची मिन्ह द्वारा संजोए गए स्वतंत्रता, स्वाधीनता और अखंडता के मूल्य – विद्वत्‍ता और पारस्परिक शिक्षा के और बौद्ध और हिन्दू आध्यात्मिक जुड़ाव का पालन करने के हमारे साझा इतिहास में निहित हैं। बुद्ध के प्रबुद्ध मार्ग ने हमारे देशों को और करीब ला दिया है। विश्व धर्म के रूप में बौद्ध धर्म की यात्रा भारत से शुरू हुई, और वियतनाम में आकर इसने एक विशिष्ट पहचान हासिल की, जो यहाँ की स्थानीय संस्कृति में अंतर्निहित है। बौद्ध भिक्षुओं और भिक्षुणियों ने लंबी-लंबी यात्राएं कीं, अपने साथ वे करुणा का संदेश लेकर गए- और व्यापारियों तथा व्यवसायियों का भी मार्गदर्शन उन्‍होंने किया। बौद्ध धर्म ने हिन्‍द महासागर के पार वैश्वीकरण और संयोग के प्रारंभिक स्‍वरूप का निर्माण किया।

8. कल, दा नांग में, मैंने वियतनाम की समृद्ध विरासत की झलक तब देखी जब मैं चाम संस्कृति के संग्रहालय और माय सोन मंदिर परिसर गया, जहां, मुझे यह देखकर खुशी हुई कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण आपकी चमत्‍कारी सांस्कृतिक कृतियों के जीर्णोद्धार में योगदान कर रहा है। लगभग 2,000 साल पहले, चाम साम्राज्य इतिहास की महान सभ्यताओं में से एक का प्रतीक था।वियतनाम से महासागर के पार तक कारोबार होता था - इसके जहाज भारत और पश्चिम एशिया तक माल ले जाते थे। ऐसा माना जाता है कि दक्षिणी भारत के पल्लव और चोल राज्यों के साथ प्राचीन वियतनाम के अच्छे समुद्री और व्यापारिक संबंध थे।

9. उन अग्रणी पर्यटकों और तीर्थ यात्रियों ने संयम और आत्म-अनुशासन, सातव्‍य तथा सामंजस्य के ढांचे के भीतर संस्कृतियों और देशों के बीच भ्रातृ-संबंधों को बढ़ावा दिया। भगवान बुद्ध के द्वारा दी गई ये महत्वपूर्ण शिक्षाएं आज भी हमारे लिए प्रासंगिक हैं।

नेशनल असेंबली के सदस्यो,

10. मैंने जिन ऐतिहासिक मूल्यों और शिक्षाओं का अभी उल्लेख किया है, उनसे सामाजिक-आर्थिक विकास के भारत के दृष्टिकोण का भी निर्माण हुआ है। हम ऐसे विकास पर विश्वास करते हैं जो लोगों पर केन्द्रित हो, जो स्थानीय समुदायों पर बोझ डालने के बजाय उनकी तरक्‍की में सहायक हो, जो प्रकृति और पर्यावरण का सम्मान तथा संरक्षण करे और यह उगाही करने वाला न हो; साथ ही, यह भ्रष्टाचार और इसी प्रकार की अन्‍य कुप्रथाओं को चुनौती देने वाला तथा हतोत्‍साहित करने वाला हो। भारत में हम, हाल के वर्षों में वियतनाम द्वारा की गई तीव्र प्रगति की भरपूर सराहना करते हैं। 1990 के दशक में यहाँ गरीबी का स्तर 70 प्रतिशत से अधिक था, वहीं आज यह 10 प्रतिशत से भी कम है। 2030 तक भारत भी निपट निर्धनता को दूर करने के कगार पर होगा।

11. हमारी अर्थव्यवस्था और समाज बड़े पैमाने पर हो रहे बदलाव से गुजर रहे हैं। प्रौद्योगिकी हमारे जीने और काम करने के तरीके को बदल रही है और स्थानीय समुदायों को सशक्त बना रही है। चाहे संचार को बढ़ावा देना हो या दूरदराज के स्थानों में वर्चुअल बैंक खाते उपलब्ध कराने हों - डिजिटल इंडिया और साधारण मोबाइल फोन भौतिक अंतराल को कम कर रहे हैं। दुनिया के सबसे बड़े पारितंत्रों में से एक अर्थात् स्टार्ट-अप के पारितंत्र को भीयुवाओं, स्‍व-प्रेरित पुरुषों और महिलाओं के बीच और यहां तक ​​कि अपनी उपज के लिए एक व्यापक बाजार तलाशते किसानों के बीच उद्यमशीलता को बढ़ावा देने के लिए प्रौद्योगिकी और अपेक्षाकृत किफायती पूंजी से लाभ प्राप्त हो रहा है। कई मित्र देशों के साथ-साथ कृषि में संलग्न हमारे नागरिकों के लिए मौसम और मृदा-पद्धति पर अमूल्य आंकड़े प्रदान करने के लिए हमारे अंतरिक्ष कार्यक्रम के माध्यम से उपग्रह प्रक्षेपित किये जा रहे हैं। हम किसी भारतीय अंतरिक्ष यात्री को अंतरिक्ष में भेजने की तैयारी कर रहे हैं। भारत को आपके देश की प्राथमिकताओं के अनुसार वियतनाम के साथ अपने विकास सम्बन्धी अनुभवों को साझा करने में प्रसन्नता होगी।

12. ऐसे आदर्शों से ही भारत के अंतर्राष्ट्रीय सहयोग का स्‍वरूप तय होता है। जलवायु परिवर्तन की चुनौती को ही लीजिये। इससे समस्‍त मानव जाति के लिए खतरा पैदा हो गया है, लेकिन भारत और वियतनाम जैसे तटीय देशों पर इसका दबाव बहुत अधिक है। जहाँ एक ओर कई कदम उठाए जाने की जरुरत है, वहीं नवीकरणीय ऊर्जा की दिशा में कार्य करना अति आवश्यक है। इसी विचार के साथ भारत ने इस वर्ष की शुरुआत में अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के स्थापना सम्मेलन की मेजबानी की है। ‘आईएसए’ एक अंतरराष्ट्रीय निकाय है जिसका मुख्यालय तो भारत में है, लेकिन इसके निहितार्थ दुनिया के सभी देशों के लिए हैं। मैं वियतनाम को आईएसए परिवार का सक्रिय सदस्य बनने के लिए आमंत्रित करता हूं।

13. भारत-प्रशांत क्षेत्र के समक्ष जलवायु परिवर्तन ही एकमात्र प्रश्न चिह्न नहीं है। यह महासागर प्रणाली वियतनाम और भारत के लिए और कई अन्य देशों और समुदायों के लिए एक संसाधन है।भारत-प्रशांत क्षेत्र के लिए वियतनाम और भारत एक समान दृष्टिकोण रखते हैं, जिनमें से एक महत्वपूर्ण घटक दक्षिण चीन सागर भी है। हम एक ऐसी नियम-आधारित व्‍यवस्‍था के हिमायती हैं जो संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करती हो, नेविगेशन और उड़ान की स्वतंत्रता के साथ-साथ पर्याप्त वाणिज्य-व्यवसाय सुनिश्चित करता हो। हमारा समान दृष्टिकोण संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून कन्‍वेंशन में उल्लिखित कानूनों सहित अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के अनुसार कानूनी और राजनयिक प्रक्रियाओं के प्रति पूरे सम्मान के साथ विवादों का शांतिपूर्ण समाधान चाहता है।

14. इस संदर्भ में, भारत को उम्‍मीद है कि वह समुद्री क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग बढ़ाने के लिए तत्पर है - उदाहरण के लिए, 2019 की शुरुआत में वियतनाम द्वारा आयोजित की जाने वाली हमारी पहली द्विपक्षीय समुद्री सुरक्षा वार्ता के माध्यम से सहयोग बढ़ेगा। समुद्री सुरक्षा, समुद्री डकैती और महासागर से होकर नशीली दवाओं की तस्करी के मुद्दे हमारे साझे मुद्दे हैं। मुझे विश्वास है कि हमारे देशों के नौसैनिक और तट रक्षक जहाजों द्वारा एक-दूसरे के बंदरगाहों पर नियमित और मैत्रीपूर्ण यात्रा कार्यक्रमों से यह सहयोग बढ़ेगा।

15. ऐसा विश्वास केवल इस जानकारी से बढ़ता है कि वियतनाम 2020 में आसियान अध्यक्ष का पद संभालेगा। भारत ने भारत-प्रशांत क्षेत्र में शांति और समृद्धि को बढ़ावा देने के लिए क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक संरचना के लिए आसियान की एकता और केन्द्रीयता तथा आसियान के नेतृत्व वाले तंत्र का लगातार समर्थन किया है। भारत ऐसा सहयोग मॉडल प्रस्तुत करता है जिसमें उसके मित्रों को विकल्प चुनने की आवश्यकता नहीं होती है, बल्कि इसमें उनके समक्ष उपलब्‍ध विकल्पों का विस्तार होता है और सभी के लिए अवसर उपलब्ध होते हैं; और जिससे एक नहीं बल्कि कई रास्ते खुलते हैं।

16. हमारे क्षेत्र से परे, भारत और वियतनाम साइबर-सुरक्षा जैसे उभरते हुए जोखिम के क्षेत्रों और बहुपक्षीय संगठनों में सहयोग के लिए प्रतिबद्ध हैं। अंतरराष्ट्रीय शासन और वैश्वीकरण के, मेहनत से प्राप्त लाभों को पुष्‍ट किया जाना चाहिए। विश्व समुदाय को दुनिया की सभी चुनौतियों का सामूहिक रूप से जवाब देना चाहिए। संयुक्त राष्ट्र में अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर एक व्यापक कन्‍वेंशन के शीघ्र अंगीकरण के लिए आम सहमति बनाने में समर्थन देने के लिए भारत वियतनाम का आभारी है।

देवियो और सज्जनो,

17. भारत और वियतनाम के राष्ट्रीय प्रयासों के मूल में हमारे लोगों की आकांक्षाएं और समृद्धि हैं। इसके लिए हमारे देशों के बीच व्यापारिक संबंध और भौतिक संपर्क बढ़ना महत्वपूर्ण है। दोनों ही देश उभरती हुई गतिशील अर्थव्यवस्थाएं हैं। वियतनाम में निर्यात-प्रेरित प्रभावशाली विकास हुआ है, और भारत आज दुनिया की सर्वाधिक तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था है। पिछले वर्ष हमारा द्विपक्षीय व्यापार 12.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँच गया और भारत वियतनाम के शीर्ष 10 व्यापारिक भागीदारों में से एक है। भारत के लिए भी वियतनाम और आसियान व्यापार-विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। मेरे साथ एक उच्च-स्तरीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भी आया हुआ है, और कल मैंने वियतनाम-भारत व्यापार मंच को संबोधित किया था। मुझे विश्वास है कि हमारे देशों के उद्यमी व्यवसायी व्यापार के नए मानदंडों तक पहुँचने में हमारी सहायता करेंगे।

18. वस्त्र और कृषि तथा कृषि प्रौद्योगिकियों, जैव-प्रौद्योगिकी और सूचना प्रौद्योगिकी में, ऊर्जा और फार्मास्यूटिकल्स में तथा बुनियादी अवसंरचना और खनिजों में सहयोग एवं पूरक सहायता की गुंजाइश है। भारतीय निवेशक, भारतीय विनिर्माता और भारतीय सेवा प्रदाता वियतनाम की ओर बहुत आशा और उत्साह की नज़र रखते हैं।

19. और इसी प्रकार से भारत के सभी लोग वियतनाम की ओर उत्साह भरी नजरों से देखते हैं। भारत में वियतनामी भोजन काफ़ी लोकप्रिय हो रहा है - और चाय के शौक़ीन भारत के लोगों के बीच वियतनामी कॉफी भी बहुत लोकप्रिय हो रही है। मेरी इच्‍छा है कि वियतनाम और भारत के बीच पर्यटन बढ़े और आने वाले समय में दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों में बढ़ोत्‍तरी हो जिससे हमारे नागरिकों को एक-दूसरे के देशों में अधिक से अधिक संख्‍या में आने-जाने में सहायता मिलेगी। कुल मिलाकर देखें तो एशिया और भारत-प्रशांत क्षेत्र में लोगों के बीच प्राचीनतम आपसी संपर्क के ध्‍वज वाहकों के रूप में- वियतनाम और भारत के बीच के लोगों के बीच का मेलजोल हमारी साझेदारी की नींव भी है और इमारत भी।

20. मेरे अतिथि-सत्कार के लिए अध्यक्ष महोदया और इस सभा के सदस्यों को एक बार पुनः धन्यवाद देते हुए, मैं, इन्हीं शब्दों के साथ अपना वक्तव्य समाप्त करता हूं और कामना करता हूँ कि भगवान बुद्ध की प्रज्ञा और करुणा एवं सहयोग का उनका संदेश हमारी जनता, हमारे दोनों देशों और हमारे साझा महासागरीय क्षेत्र का मार्गदर्शन करे।

धन्यवाद!