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अंतरराष्ट्रीय सैन्य चिकित्सा समिति के 42वें विश्व सम्मेलन के समापन समारोह में भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द का अभिभाषण

नई दिल्ली: 24.11.2017

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मुझे अंतरराष्ट्रीय सैन्य चिकित्सा समिति के 42वें विश्व सम्मेलन के समापन समारोह में आज आपके बीच उपस्थित होकर प्रसन्नता हो रही है। मुझे बताया गया है कि इस सम्मेलन के दौरान आप सभी प्रतिभागियों अर्थात् 74 सदस्य राष्ट्रों के प्रतिनिधियों के बीच उत्कृष्ट विचार-विमर्श हुआ है। मैं सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए अंतरराष्ट्रीय सैन्य चिकित्सा समिति और भारतीय सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा को बधाई देता हूं।

2. लगभग एक शताब्दी पहले से लेकर अब तक अंतरराष्ट्रीय सैन्य चिकित्सा समिति,विश्व भर में सैन्य चिकित्सा व्यवहार पर एक सार्थक प्रभाव डालती आ रही है। सैन्य चिकित्सा सेवाएं बहुत ही विषम परिस्थितियों में स्वास्थ्यचर्या उपलब्ध कराते हैं। वे वास्तव में चिकित्सा व्यवसाय में ‘उत्कृष्ट उदाहरण’के रूप में पेशे में कार्य करते हैं। यह उत्कृष्टता रातों-रात आती बल्कि वर्षों की लगन और प्रशिक्षण के जरिए हासिल की जाती है।

3. अंतरराष्ट्रीय सैन्य चिकित्सा समिति अपने क्षेत्रीय और विश्व सम्मेलनों के जरिए आदान-प्रदान और सार्थक शिक्षण का एक विश्व मंच मुहैया कराती है। आप लोग सैन्य चिकित्सा,मानवीय सहायता और आपदा राहत, सामूहिक दुर्घटना चिकित्सा और रोग प्रकोप सहित संक्रामक रोग महामारी विज्ञान,चिकित्सा संभार-तंत्र और अभियानों से जुड़े सामयिक, तात्कालिक और प्रासंगिक मुद्दों से भलीभांति निपटने में सक्षम हैं।

4. चिकित्सा सेवा किसी भी सेना का एक महत्वपूर्ण स्तंभ होती है। भारत की सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा न केवल सशस्त्र सेनाओं को उत्कृष्ट सेवा प्रदान करती आ रही है बल्कि शांति व युद्ध दोनों में राष्ट्र की सेवा करती आ रही है। प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं और संकटकाल में यह सेना सबसे पहले महत्वपूर्ण मदद उपलब्ध कराती है और हमेशा तत्पर स्थिति में रहती है। सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा द्वारा हमारे सम्माननीय पूर्व सैनिकों सहित सेवारत जवानों और उनके परिजनों को निवारक, उपचारी और पुनर्वास संबंधी चिकित्सा चर्चा उपलब्ध कराने और उसे बढ़ावा देने के दायित्व को सराहनीय कार्यकौशल के साथ निभाया जा रहा है।

5. इस संदर्भ में, मुझे नई दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय सैन्य चिकित्सा समिति के 42वें सम्मेलन में पिछले पांच दिन के दौरान हुई परिचर्चा की विषय-वस्तु पर गौर करके बहुत खुशी हुई है। इस वर्ष के विश्व सम्मेलन का विषय ‘मिलिट्री मेडिसिन इन ट्रांजिशन’ ठीक ही रखा गया है। यह विषय अपने आप में ही चिकित्सा विज्ञान के गतिशील और प्रगतिशील स्वरूप को तथा विशेष रूप से सैन्य चिकित्सा कार्य के निरंतर बदलते हुए तथा उतार-चढ़ाव भरे माहौल दोनों को प्रतिबिम्बित करता है। मुझे विश्वास है कि विषय-शीर्ष में शामिल ‘ट्रांजिशन’शब्द का तात्पर्य, निरंतर आ रहे सकारात्मक बदलाव और मौजूदा स्थिति पर आधारित सीख से है।

6. मुझे बताया गया है कि सम्मेलन में आपातकालीन चिकित्सा, पर्यावरणीय चिकित्सा, जीवनशैली से जुड़े रोग, सामूहिक दुर्घटना प्रबंधन, रोग के प्रकोप का मुकाबला, पुनर्वास चिकित्सा आदि जैसे विषयों पर विचार-विमर्श हुआ है। ये सभी मुद्दे हमारे नागरिकों के लिए बहुत प्रासंगिक हैं लेकिन महत्वपूर्ण मोर्चों पर तैनात व्यक्तियों अर्थात् हमारे बहादुर सैनिकों के लिए विशेष रूप से अति प्रासंगिक हैं।

7. किसी भी देश के लिए उसके सैनिक, बेशकीमती और खास नागरिक होते हैं। जान जोखिम में डालकर किसी खतरे से देश की रक्षा करने की प्रतिज्ञा उसे एक विशेष दर्जा देता है। सैनिक एक सुनियोजित अनुशासन से होकर गुजरता है और इस प्रक्रिया में वह अकसर कठोर प्रतिकूल वातावरण के संपर्क में आता है जिससे उसके शरीर पर शारीरिक और मानसिक दबाव पड़ता है। हमारे जैसे विशाल देश में, हमारी पराक्रमी सेना भी ऊंचाई वाले स्थानों पर बर्फीली हालात में, रेगिस्तान, जंगल, तूफानी समुद्र और वायुमंडलीय विषम पर्यावरणीय परिस्थितियों का सामना करती है। मुझे विश्वास है कि विशिष्ट सैन्य वातावरण से संबंधित इन चिकित्सीय पहलुओं पर हुई परिचर्चा, वक्ताओं की बहु-विध जानकारी और अनुभव के कारण उपयोगी सिद्ध होगी।

8. अब मैं, सशस्त्र सेना में शामिल होने वाली बहादुर महिलाओं के बारे मे कुछ कहना चाहूंगा। पूरे विश्व में महिलाएं, हमेशा से किसी न किसी भूमिका में सशस्त्र सेनाओं का एक अहम हिस्सा रही हैं। अलग-अलग देशों में सैन्य सेवाओं में महिलाओं की नियुक्ति और रोजगार की शर्तें भी अलग-अलग हैं। अब, ज्यादा से ज्यादा देश उन्हें अधिकाधिक अधिक दायित्व सौंपने के लिए आगे आ रहे हैं। भारत में भी महिलाएं सक्षम सैनिक सिद्ध हुई हैं चाहे वे किसी भी शाखा या सेवा में गई हों।

9. ऐतिहासिक रूप से युद्ध चिकित्सा चर्चा के क्षेत्र में, स्वास्थ्यचर्या प्रदाताओं के तौर पर उनकी विशिष्ट ख्याति है। भारतीय सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा में महिलाएं हमारी स्वतंत्रता के बाद से ही चिकित्सा, दंत और परिचर्या अधिकारियों के रूप में वर्दी धारण करती रही हैं और बहुत ही मुश्किल हालात में भी उन्होंने उत्कृष्ट सेवाएं दी हैं और स्वयं को सिद्ध किया है। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि कार्यक्रम में युद्धक सैनिक के रूप में महिलाओं की भूमिका पर विचार-विमर्श के लिए एक विशेष पैनल परिचर्चा रखी गई थी।

10. वर्तमान विश्व परिदृश्य को देखते हुए, यह जरूरी है कि हम चिकित्सा के दोनों पहलुओं-प्रशिक्षण और चिकित्सा अनुसंधान-पर जोर दें। दोनों ही चिकित्सा व्यवसाय की प्रगतिशील और अनिवार्य आवश्यकताएं हैं, जिनसे संगठन को और व्यक्ति को निरंतर विकास करने और आगे बढ़ने में मदद मिलती है। मैं प्रशिक्षण और चिकित्सा अनुसंधान के दोनों पहलुओं पर ध्यान देने के लिए अंतरराष्ट्रीय सैन्य चिकित्सा समिति के 42वें विश्व सम्मेलन की सराहना करता हूं। मुझे विश्वास है कि आपकी परिचर्चाओं से सैन्य चिकित्सा समुदाय को प्रभूत लाभ होगा; परंतु इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि इससे अपनी-अपनी राष्ट्रीय सेनाओं के सैनिकों के स्वास्थ्य और दीर्घजीविता में भी सकारात्मक लाभ पहुंचेगा।

11. मैं, भारत की ओर से पूरे सहयोग और समर्थन का विश्वास दिलाते हुए अंतरराष्ट्रीय सैन्य चिकित्सा समिति विश्व कांग्रेस को उनके भावी प्रयासों के सफल होने की शुभकामनाएं देता हूं। मैं एक बार फिर इस सम्मेलन की मेज़बानी के लिए भारतीय सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा की सराहना करता हूं।


धन्यवाद,

जय हिन्द!