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भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द का विभिन्न निर्माण कार्यों एवं परियोजनाओं के शिलान्यास एवं लोकार्पण समारोह में सम्बोधन

भोपाल :28.05.2022

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मध्य प्रदेश के विभिन्न नगरों में स्वास्थ्य सुविधाओं में बढ़ोतरी और नवीन संस्थानों की स्थापना से जुड़े भूमि-पूजन कार्यक्रम में, आज, आप सबके बीच आकर मुझे बहुत प्रसन्नता हो रही है।

मध्य प्रदेश को भारत का ह्रदय प्रदेश कहा जाता है। इस प्रदेश के साथ मेरी भी अनेक मधुर स्मृतियां जुड़ी हुई हैं। मेरे लिए यह विशेष प्रसन्नता का विषय है कि राष्ट्रपति के रूप में मध्य प्रदेश की इस सातवीं यात्रा के दौरान मुझे आरोग्य,आयुर्वेद एवं अन्य चिकित्सा पद्धियों को बढ़ावा देने से जुड़े कार्यक्रमों में शामिल होने और चिकित्सा सुविधाओं में बढ़ोतरी के लिए विभिन्न परियोजनाओं के भूमि-पूजन का सुअवसर प्राप्त हुआ है।इस विशेष अवसर पर, मैं मध्य प्रदेश के लोगों को बधाई देता हूं।

आज मुझे, तीन शहरी स्वास्थ्य संस्थाओं के लोकार्पण का भी सुअवसर प्राप्त हुआ है। आज प्रात: ही,मैंने आरोग्य भारती द्वारा आयोजित 'One Nation- One HealthSystem is the need of the hour'कार्यक्रम में भाग लिया। कल मैं उज्जैन जा रहा हूं ,जहां अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन के 59वें अधिवेशन को संबोधित करने और शासकीय धन्वंतरि आयुर्वेद चिकित्सा महाविद्यालय के नवनिर्मित भवन के लोकार्पण का कार्यक्रम है। प्रदेश में बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूती प्रदान करने के लिए मैं राज्यपाल श्री मंगूभाई पटेल और मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान तथा उनकी पूरी टीम की सराहना करता हूं।

देवियो और सज्जनो,

कोविड-19 महामारी की असाधारण चुनौती का सभी देशवासियों ने एकजुट होकर दृढ़ संकल्प से सामना किया। हमारे डॉक्टर्स,नर्सेस, स्वास्थ्य कर्मियों तथा जन-साधारण ने सेवा,त्याग और बलिदान के अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किये। विकसित देशों के मुकाबले भारत की बड़ी जनसंख्या तथा अन्‍य चुनौतियों के बावजूद हम कोविड महामारी पर नियंत्रण करने में बहुत हद तक सफल रहे। आज देश में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करना हमारी प्राथमिकता है। समाज के सभी वर्गों के लोग, किफायती दरों पर समुचित उपचार कराने में सक्षम हों, ऐसा प्रयास सभी सरकारों का होना ही चाहिए।

आज यहां पर, गांधी चिकित्सा महाविद्यालय ,भोपाल के अधीन रीजनल इंस्टिट्यूट ऑफ रेस्पिरेटरी डिजीज औरसेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ऑर्थोपेडिक्स की स्थापना के लिए भूमि-पूजन संपन्न हुआ है। इसके अलावा देवास ,सीहोर, शाजापुर ,जबलपुर, इंदौर ,मुरैना, उज्जैन तथा भोपाल आदि में जिला चिकित्सालयों एवं सिविल अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए भी स्वास्थ्य परियोजनाओं को कार्यान्वित किया जाने वाला है। मुझे विश्वास है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से उन क्षेत्रों में लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।

देवियो और सज्जनो,

जब कोई बीमार होता है या किसी पीड़ा से ग्रस्त हो जाता है,तो सबसे पहले उसके मुंह से भगवान का नाम निकलता है और उसके बाद,डॉक्टर में ही उसे भगवान दिखाई देने लगता है। अगर मुश्किल के समय एक अच्छा डॉक्टर मिल जाए और वह रोगी की ठीक से देखभाल करे, तो उससे बढ़कर रोगी के लिए कुछ भी नहीं होता है।

और यदि कोई चिकित्सक रोगी के प्रति सद्भावना रखते हुए उसे तसल्ली के दो शब्द बोल देता है, तो रोगी के लिए वे शब्द भी, पथ्य की तरह काम करते हैं। जीवन से निराश या रोग से हताश व्यक्ति की प्राण-रक्षा कभी-कभी ऐसे सांत्वनापूर्ण शब्दों से भी हो जाती है।

चिकित्सकों का मूलमंत्र होना चाहिए - कामये दु:ख तप्तानाम् प्राणिनाम् आर्तिनाशनम्अर्थात् दुख से संतप्त प्राणियों का कष्ट समाप्त हो जाए। मरीज के जीवन की रक्षा के लिए डॉक्टर को बड़ी सावधानी व जिम्मेदारी से सभी कार्य करने होते हैं। काम का बोझ भी रहता है फिर भी कुशल डॉक्टर हर परिस्थिति में सेवा भाव से मरीज की देख-भाल और चिकित्‍सा करता है।

परन्तु कभी-कभी ऐसी घटनाएं सामने आती हैं,जिनमें डॉक्टर के साथ बदसुलूकी की जाती है। यह विचार करना चाहिए कि डॉक्टर भी मनुष्य ही होता है और कभी-कभी उससे भी गलती हो सकती है। इसलिए, रोगियों और उनके तीमारदारों को संयम और धैर्य से काम लेना चाहिए।

भारत के राष्ट्रपति के रूप में मुझे कई देशों की यात्रा का सुअवसर प्राप्त हुआ है। अनेक देशों में, भारतीय मूल के डॉक्टर बड़ी संख्या में काम करते हैं। वहां भी उन्हें बहुत सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है। विदेशों से बहुत से लोग भारत में इलाज करवाने आते हैं। यदि देश में चिकित्सा सुविधाएं बढ़ेंगी और उन्नत चिकित्सा केन्द्र खुलेंगे तो देश के लोगों को तो लाभ होगा ही, मेडिकल टूरिजम के बढ़ने से विदेशी मुद्रा की आमद भी बढ़ेगी।

देवियो और सज्जनो,

प्राणी मात्र की सेवा करना मनुष्य का परम कर्त्तव्य है। बड़ी संख्या में हमारे चिकित्सक भी, ‘ सर्व भूत हिते रता: अर्थात् सभी प्राणियों की सेवा की भावना से कार्य कर रहे हैं। पिछले कई वर्षों में पद्म पुरस्कार प्रदान करते समय मेरे समक्ष ऐसे कई उदाहरण आए जिनसे यह पता चला कि हमारे प्रतिभावान डॉक्टर्स ने विदेशों में बसने तथा बड़े अस्पतालों में काम करने की जगह,देश के जनजातीय तथा ग्रामीण क्षेत्रों में रहकर सेवा तथा त्याग का व्रत लिया।

पिछले वर्ष नवम्बर में, राष्ट्रपति भवन में मुझे मध्य प्रदेश की डॉक्टर लीला जोशी को चिकित्सा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित करने का अवसर प्राप्त हुआ था। डॉक्टर लीला जोशी, स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं औररतलाम जिले की जनजातीय, ग्रामीण तथा शहरी मलिन बस्तियों में एनीमिया के कारण होने वाली मृत्यु दर को कम करने के लिए दो दशकों से भी अधिक समय से कार्य कर रही हैं। भारतीय रेलवे से रिटायर होने के बाद उन्होंने किसी बड़े शहर में रहने की बजाय रतलाम को अपनी कर्मभूमि बनाया और जनजातीय समाज की सेवा को अपना मिशन बनाया।

अंतिम सोपान के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने और राज्य के आठ करोड़ से अधिक लोगों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए भारत सरकार और मध्य प्रदेश सरकार के प्रयासों की सफलता के लिए ऐसे ही सेवाव्रती चिकित्सकों की आवश्यकता है।

मेरी शुभकामना है कि आप सभी के प्रयास सफल हों और राज्य के लोग निरोगी एवं सुखी जीवन व्यतीत करें।

धन्यवाद ,

जय हिंद !