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भारत के राष्ट्रपति ने महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के स्मरणोत्सव की राष्ट्रीय कार्यान्वयन समिति की प्रथम बैठक की अध्यक्षता की

राष्ट्रपति भवन : 02.05.2018

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भारत के राष्ट्रपति, श्री राम नाथ कोविन्द ने आज (02 मई, 2018) राष्ट्रपति भवन में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के स्मरणोत्सव की राष्ट्रीय कार्यान्वयन समिति की प्रथम बैठक की अध्यक्षता की। समिति में भारत से 116 सदस्यों सहित कुल 125 सदस्य हैं जिनमें राष्ट्रपति (अध्यक्ष), उपराष्ट्रपति, प्रधान मंत्री, केन्द्रीय मंत्री, पूर्व प्रधान मंत्री, मुख्यमंत्री, कई दलों के वरिष्ठ सांसद एवं राजनीतिक नेता, प्रख्यात गांधीवादी, सामाजिक विचारक और भारतीय समाज के विभिन्न वर्गों व क्षेत्रीय विविधता का प्रतिनिधित्व करने वाले कार्यकर्ता शामिल हैं। समिति में नौ अंतरराष्ट्रीय सदस्य भी शामिल हैं जिनमें संयुक्त राष्ट्र के पूर्व महासचिव श्री कोफी अन्नान और श्री बान की-मून, नोबेल विजेता दक्षिण अफ्रीका के आर्कबिशप डेसमंड टूटू तथा अमरीका के पूर्व उपराष्ट्रपति अल गोर शामिल हैं। आज की बैठक में समिति के 82 सदस्यों ने भाग लिया जिनमें दो विदेशी सदस्य भी शामिल हैं (समिति के सदस्यों और भाग लेने वाले सदस्यों की सूचियां संलग्न हैं)।

बैठक केन्द्रीय गृह मंत्री, श्री राजनाथ सिंह के आरंभिक उद्बोधन से शुरू हुई; उन्होंने कहा कि स्मरणोत्सव का जोर बल समसामयिक माध्यम में लोगों के लिए और लोगों के द्वारा गांधीवादी मूल्यों और सिद्धांतों को प्रस्तुत करने पर होना चाहिए। तत्पश्चात् उन्होंने बैठक को संबोधित करने के लिए भारत के राष्ट्रपति को आमंत्रित किया।

अपने अभिभाषण में, राष्ट्रपति कोविन्द ने रेखांकित किया कि महात्मा गांधी केवल भारत के ही नहीं हैं। मानव-मात्र के लिए वे भारत की महानतम देन हैं और उनका नाम सभी महाद्वीपों में गूंज रहा है। महात्मा गांधी, 20वीं शताब्दी के सर्वाधिक प्रभावशाली भारतीय थे। वे हमारे अधिकांशत: अहिंसक, समावेशी और लोकतांत्रिक स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा थे। वे हमारे लिए एक नैतिक कसौटी हैं जिसके आधार पर हम सार्वजनिक जीवन में सेवा-रत पुरुषों व महिलाओं, राजनीतिक विचारों और सरकारी नीतियों तथा हमारे देश की और हमारी जनता की उम्मीदों और आकांक्षाओं की परख करते हैं। उनकी विरासत इतनी समृद्ध और इतनी व्यापक है कि कुछ घंटे तो छोड़िए, अगर कुछ दिन भी दे दिए जाएं तो हम उनका पूरी तरह वर्णन नहीं कर सकते।

राष्ट्रपति ने कहा कि महात्मा गांधी की 150वीं जयंती का तात्पर्य उस महान व्यक्तित्व पर गर्व करने और इतिहास का स्मरण करने से कहीं ज्यादा है। गांधीजी ़खुद भी यही चाहते कि हम इस अवसर पर, देश और विदेश में न्यायपूर्ण, ईमानदार और निष्पक्ष समाज के निर्माण के लक्ष्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता नए सिरे से दृढ़ करें। महात्मा गांधी हमारा अतीत हैं, वे हमारा वर्तमान हैं और हमारे भविष्य भी। उन्होंने बहुत से विषय और विचार हमारे सामने रखे और लिखे हैं- हालांकि उनमें से कुछ विचार अपने समय से काफी आगे की चीज थे-लेकिन वे विचार आज, पहले से अधिक प्रासंगिक हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि जब हम भारत को जाति और पंथ के पूर्वाग्रहों से मुक्त करने के लिए कार्य करते हैं तब हम गांधीजी को याद करते हैं। जब हम ‘स्वच्छ भारत’ और अपेक्षाकृत साफ-सुथरे तथा स्वास्थ्यप्रद भारत के निर्माण के लिए प्रयास करते हैं, तब गांधीजी का उदाहरण देते हैं। जब हम महिलाओं और बच्चों के अधिकारों और छोटे-छोटे तथा पिछड़े समूहों की नागरिक स्वतंत्रता की बात करते हैं तब गांधीजी को याद करते हैं। जब हम भारत के किसानों और भारत के गांवों की सेहत और बेहतरी की बात करते हैं तब भी हम गांधीजी को याद करते हैं। जब हम आखिरी गांव और आखिरी घर तक बिजली पहुंचाने का प्रयास करते हैं तब गांधीजी को याद करते हैं; और जब हम सौर और नवीकरणीय ऊर्जा में क्षमता निर्माण के लिए काम करते हैं तब गांधीजी को याद करते हैं। जब जलवायु परिवर्तन का मुकाबला करते हैं और हरित एवं पर्यावरण अनुकूल रहन-सहन को बढ़ावा देते हैं, तब हम गांधीजी को याद करते हैं। ये सतत विकास की बातें, गांधीजी के उस सरल मंत्र की प्रतिध्वनि ही तो हैं कि -‘धरती के पास सबकी जरूरतें पूरी करने के लिए तो पर्याप्त साधन हैं लेकिन हर किसी के लालच की पूर्ति के लिए नहीं’।

राष्ट्रपति ने कहा कि इसी वजह से, 150वीं जयंती के स्मरणोत्सव का महत्व विश्वव्यापी है। आइए, संयुक्त राष्ट्र संघ और अन्य बहुपक्षीय संगठनों जैसे मंचों का सदुपयोग करते हुए, हम इसे एक विश्व-समारोह का स्वरूप दें। हमारा जोर कार्यक्रमों पर ही न हो बल्कि उन ठोस, व्यावहारिक विरासतों के सृजन पर होना चाहिए जिनसे आम लोगों के जीवन में बदलाव आए, चाहे वे दुनिया के किसी भी हिस्से में क्यों न रहते हों।

इसके बाद, राष्ट्रपति ने उपस्थित लोगों से महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाए जाने के बारे में अपने विचार और अपने सुझाव साझा करने का आग्रह किया।

राष्ट्रपति के संबोधन के बाद, केन्द्रीय मंत्रियों, मुख्य मंत्रियों और अन्य लोगों सहित अनेक समिति सदस्यों ने सुझाव दिए कि 02 अक्तूबर, 2018 से 02 अक्तूबर 2020 तक चलने वाले स्मरणोत्सव की योजना कैसे बनाई जाए। सुझावों में किसानों की मदद के लिए कल्याण कार्यक्रम बनाए जाने और विशिष्ट उपाय किए जाने से लेकर चलती-फिरती प्रदर्शनियां लगाने महात्मा गांधी से जुड़े हुए विशिष्ट स्थानों और राज्यों में अवसंरचना और संपर्कों का निर्माण किए जाने सहित विभिन्न सुझाव दिए गए।

चूंकि पूरी राष्ट्रीय समिति की बैठकें बार-बार आयोजित किया जाना व्यवहार्य नहीं हो सकेगा इसलिए बैठक में गांधीजी की 150वीं जयंती के स्मरणोत्सव पर आगे कार्य करने के प्रधान मंत्री की अध्यक्षता में एक लघुतर कार्यकारी समिति गठित करने का निर्णय लिया गया।

बैठक के उद्देश्य को सारगर्भित रूप में सामने रखते हुए प्रधान मंत्री, श्री नरेन्द्र मोदी ने रचनात्मक सुझावों और सिफारिशों के लिए समिति के विभिन्न सदस्यों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण है कि इस समारोह को इस प्रकार मनाया जाए कि महात्मा गांधी का भावी पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा बने रहना सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने कहा कि इस स्मरणोत्सव का सदुपयोग वैश्विक रूप से भी गांधीजी के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए किया जाना चाहिए।

प्रधान मंत्री ने जोर दिया कि इस समारोह से जुड़े सभी कार्यक्रम ‘कार्यांजलि’ या ‘कार्यों में गांधी का अनुसरण’ से जोड़कर तैयार किए जाने चाहिए। उन्होंने खुशी व्यक्त की कि आज प्राप्त हुए सुझाव अधिकतर कार्य-परक हैं। प्रधान मंत्री ने कहा कि महात्मा गांधी और उनकी शिक्षाएं कालातीत हैं। उन्होंने कहा कि विश्वभर के लोगों के लिए महात्मा गांधी, भारत को समझने का एक माध्यम बन सकते हैं। उनका मानना है कि महात्मा गांधी द्वारा दिखाए गए रास्ते पर चलकर अनेक समकालीन समस्याओं के समाधान ढूंढ़े जा सकते हैं।

प्रधान मंत्री ने स्मरणोत्सव में प्रौद्योगिकी के प्रयोग की आवश्यकता पर बल दिया ताकि संपूर्ण विश्व को इनके बारे में जानकारी मिल सके और वे इनमें भाग ले सके। उन्होंने अह्वान किया कि समारोह सरकारी कार्यक्रमों की सीमा से परे जाकर आंदोलन या जन भागीदारी का स्वरूप लें, ऐसा प्रयास करना है। उन्होंने सभी राज्य सरकारों से भी अनुरोध किया कि वे राज्य स्तर पर ऐसे ही विचार-विमर्श करें और योजनाएं बनाएं।

यह विज्ञप्ति 2040 बजे जारी की गई।